Thursday, July 28, 2005

हिंदी इंटरनेट एक्सप्लोरर

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का विकास अमरीका के सिलिकन वैली से निकलकर अब मध्यप्रदेश के गाँवों में पहुँच गया है. पूरी ख़बर पढ़िये

4 comments:

आलोक said...

चिट्ठी लिखी है उनको - dangijs ऍट yahoo पे। शायद वे भी चिट्ठा लिखते हों, या लिखना चाहें।

Debashish said...

Sad part is such efforts go unnoticed, Google told me that this news was reported almost a year back The Hindu (http://www.hindu.com/2004/12/16/stories/2004121607140500.htm). Thanks to BBC for reviving a worthy news.

Raman Kaul said...

हिन्दी कंप्यूटिंग में जो तरक्की हो रही है, उसे दिन दूनी और रात चौगुनी ही कहा जा सकता है। पर एक बात मेरी समझ में नहीं आती -- साइबर-कैफेओं पर अक्सर हिन्दी पढ़ने की सुविधा क्यों नहीं होती? मैंने जितने परिचितों को हिन्दी साइटों के लिंक भेजे हैं, वे लौट कर कहते हैं कि वहाँ तो बक्से दिखे। विंडोज़-XP में तो हिन्दी बिना किसी कोशिश के दिखनी चाहिए, जैसे कि मेरा यहाँ (US) के साइबर-कैफे, लाइब्रेरी आदि में अनुभव है। क्या इस का अर्थ है कि भारत के अधिकांश साइबरकैफेओं में पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम हैं? क्या इस के लिए कोई अभियान चलाया जा सकता है कि हमारे स्वयंसेवक साइबरकैफेओं का हिन्दीकरण करें?

Jitendra Chaudhary said...

हिन्दुस्तान मे साइबर कैफे वालो मे सबसे बड़ा समुह है सिफी कैफे का, लेकिन वे लोग भी विन्डोज 98 प्रयोग करते है, शायद कुछ रायल्टी वगैरहा का चक्कर है, और जनाब विन्डोज 98 मे आपको हिन्दी की जगह डब्बे ही नजर आयेंगे. मै तो बहुत परेशान हुआ, और तो और, अपनी गूगलमेल भी नही चलती, क्योकि उसके लिये जावा चाहिये होती है, अब सिफी वालों को कौन समझाये?